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रामायण >> श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड) श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड)गोस्वामी तुलसीदास
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भारत की सर्वाधिक प्रचलित रामायण। द्वितीय सोपान अयोध्याकाण्ड
आरत जननी जानि सब भरत सनेह सुजान।
कहेउ बनावन पालकी सजन सुखासन जान॥१८६॥
कहेउ बनावन पालकी सजन सुखासन जान॥१८६॥
स्नेह के सुजान (प्रेम के तत्त्व को जाननेवाले) भरतजीने सब माताओंको आर्त
(दुःखी) जानकर उनके लिये पालकियाँ तैयार करने तथा सुखासन यान (सुखपाल) सजाने के
लिये कहा ॥ १८६॥
चक्क चक्कि जिमि पुर नर नारी।
चहत प्रात उर आरत भारी॥
जागत सब निसि भयउ बिहाना।
भरत बोलाए सचिव सुजाना॥
चहत प्रात उर आरत भारी॥
जागत सब निसि भयउ बिहाना।
भरत बोलाए सचिव सुजाना॥
नगर के नर-नारी चकवे-चकवी की भाँति हृदय में अत्यन्त आर्त होकर प्रातःकाल का
होना चाहते हैं। सारी रात जागते-जागते सबेरा हो गया। तब भरतजी ने चतुर
मन्त्रियों को बुलवाया-- ॥१॥
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