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रामायण >> श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड) श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड)गोस्वामी तुलसीदास
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भारत की सर्वाधिक प्रचलित रामायण। द्वितीय सोपान अयोध्याकाण्ड
देखे थल तीरथ सकल भरत पाँच दिन माझ।
कहत सुनत हरिहर सुजसु गयउ दिवसु भइ साँझ॥३१२॥
कहत सुनत हरिहर सुजसु गयउ दिवसु भइ साँझ॥३१२॥
भरतजीने पाँच दिनमें सब तीर्थस्थानोंके दर्शन कर लिये। भगवान् विष्णु और
महादेवजीका सुन्दर यश कहते-सुनते वह (पाँचवाँ) दिन भी बीत गया, सन्ध्या हो गयी॥
३१२ ॥
भोर न्हाइ सबु जुरा समाजू।
भरत भूमिसुर तेरहुति राजू॥
भल दिन आजु जानि मन माहीं।
रामु कृपाल कहत सकुचाहीं॥
भरत भूमिसुर तेरहुति राजू॥
भल दिन आजु जानि मन माहीं।
रामु कृपाल कहत सकुचाहीं॥
[अगले छठे दिन] सबेरे स्नान करके भरतजी, ब्राह्मण, राजा जनक और सारा समाज आ
जुटा। आज सबको विदा करनेके लिये अच्छा दिन है, यह मनमें जानकर भी कृपालु
श्रीरामजी कहनेमें सकुचा रहे हैं ॥१॥
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