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रामायण >> श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड) श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड)गोस्वामी तुलसीदास
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भारत की सर्वाधिक प्रचलित रामायण। द्वितीय सोपान अयोध्याकाण्ड
भरतजी का अयोध्या लौटना
सई उतरि गोमती नहाए।
चौथे दिवस अवधपुर आए।
जनकु रहे पुर बासर चारी।
राज काज सब साज सँभारी॥
चौथे दिवस अवधपुर आए।
जनकु रहे पुर बासर चारी।
राज काज सब साज सँभारी॥
फिर सई उतरकर गोमतीजीमें स्नान किया और चौथे दिन सब अयोध्याजी जा पहुँचे। जनकजी
चार दिन अयोध्याजीमें रहे और राजकाज एवं सब साज-सामानको सँभालकर, ॥३॥
सौंपि सचिव गुर भरतहि राजू।
तेरहुति चले साजि सबु साजू॥
नगर नारि नर गुर सिख मानी।
बसे सुखेन राम रजधानी॥
तेरहुति चले साजि सबु साजू॥
नगर नारि नर गुर सिख मानी।
बसे सुखेन राम रजधानी॥
तथा मन्त्री, गुरुजी तथा भरतजीको राज्य सौंपकर, सारा साज-सामान ठीक करके
तिरहुतको चले। नगरके स्त्री-पुरुष गुरुजीकी शिक्षा मानकर श्रीरामजीकी राजधानी
अयोध्याजीमें सुखपूर्वक रहने लगे॥४॥
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