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रामायण >> श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड) श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड)गोस्वामी तुलसीदास
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भारत की सर्वाधिक प्रचलित रामायण। द्वितीय सोपान अयोध्याकाण्ड
श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
समाचार जब लछिमन पाए।
ब्याकुल बिलख बदन उठि धाए॥
कंप पुलक तन नयन सनीरा।
गहे चरन अति प्रेम अधीरा॥
ब्याकुल बिलख बदन उठि धाए॥
कंप पुलक तन नयन सनीरा।
गहे चरन अति प्रेम अधीरा॥
कहि न सकत कछु चितवत ठाढ़े।
मीनु दीन जनु जल तें काढ़े॥
सोचु हृदयँ बिधि का होनिहारा।
सबु सुखु सुकृतु सिरान हमारा॥
मीनु दीन जनु जल तें काढ़े॥
सोचु हृदयँ बिधि का होनिहारा।
सबु सुखु सुकृतु सिरान हमारा॥
मो कहुँ काह कहब रघुनाथा।
रखिहहिं भवन कि लेहहिं साथा॥
राम बिलोकि बंधु कर जोरें।
देह गेह सब सन तृनु तोरें॥
रखिहहिं भवन कि लेहहिं साथा॥
राम बिलोकि बंधु कर जोरें।
देह गेह सब सन तृनु तोरें॥
बोले बचनु राम नय नागर।
सील सनेह सरल सुख सागर॥
तात प्रेम बस जनि कदराहू।
समुझि हृदयँ परिनाम उछाहू॥
सील सनेह सरल सुख सागर॥
तात प्रेम बस जनि कदराहू।
समुझि हृदयँ परिनाम उछाहू॥






