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रामायण >> श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड) श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड)गोस्वामी तुलसीदास
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भारत की सर्वाधिक प्रचलित रामायण। द्वितीय सोपान अयोध्याकाण्ड
दो०- सुठि सुकुमार कुमार दोउ, जनकसुता सुकुमारि।
रथ चढ़ाइ देखराइ बनु, फिरेहु गएँ दिन चारि॥८१॥
रथ चढ़ाइ देखराइ बनु, फिरेहु गएँ दिन चारि॥८१॥
जौं नहिं फिरहिं धीर दोउ भाई।
सत्यसंध दृढ़ब्रत रघुराई॥
तौ तुम्ह बिनय करेहु कर जोरी।
फेरिअ प्रभु मिथिलेसकिसोरी॥
सत्यसंध दृढ़ब्रत रघुराई॥
तौ तुम्ह बिनय करेहु कर जोरी।
फेरिअ प्रभु मिथिलेसकिसोरी॥
जब सिय कानन देखि डेराई।
कहेहु मोरि सिख अवसरु पाई॥
सासु ससुर अस कहेउ सँदेसू।
पुत्रि फिरिअ बन बहुत कलेसू॥
कहेहु मोरि सिख अवसरु पाई॥
सासु ससुर अस कहेउ सँदेसू।
पुत्रि फिरिअ बन बहुत कलेसू॥
पितुगृह कबहुँ कबहुँ ससुरारी।
रहेहु जहाँ रुचि होइ तुम्हारी॥
एहि बिधि करेहु उपाय कदंबा।
फिरइ त होइ प्रान अवलंबा॥
रहेहु जहाँ रुचि होइ तुम्हारी॥
एहि बिधि करेहु उपाय कदंबा।
फिरइ त होइ प्रान अवलंबा॥






