|
रामायण >> श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड) श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड)गोस्वामी तुलसीदास
|
|
||||||
भारत की सर्वाधिक प्रचलित रामायण। द्वितीय सोपान अयोध्याकाण्ड
दो०- सबु करि मागहिं एक फलु राम चरन रति होउ।
तिन्ह के मन मंदिर बसहु सिय रघुनंदन दोउ॥१२९॥
तिन्ह के मन मंदिर बसहु सिय रघुनंदन दोउ॥१२९॥
और ये सब कर्म करके सबका एकमात्र यही फल माँगते हैं कि श्रीरामचन्द्रजीके
चरणोंमें हमारी प्रीति हो; उन लोगों के मनरूपी मन्दिरों में सीताजी और रघुकुल
को आनन्दित करनेवाले आप दोनों बसिये॥१२९॥
काम कोह मद मान न मोहा।
लोभ न छोभ न राग न द्रोहा॥
जिन्ह के कपट दंभ नहिं माया।
तिन्ह के हृदय बसहु रघुराया।
लोभ न छोभ न राग न द्रोहा॥
जिन्ह के कपट दंभ नहिं माया।
तिन्ह के हृदय बसहु रघुराया।
जिनके न तो काम, क्रोध, मद, अभिमान और मोह है; न लोभ है, न क्षोभ है; न राग है,
न द्वेष है; और न कपट, दम्भ और माया ही है-हे रघुराज! आप उनके हृदय में निवास
कीजिये॥१॥
सब के प्रिय सब के हितकारी।
दुख सुख सरिस प्रसंसा गारी॥
कहहिं सत्य प्रिय बचन बिचारी।
जागत सोवत सरन तुम्हारी॥
दुख सुख सरिस प्रसंसा गारी॥
कहहिं सत्य प्रिय बचन बिचारी।
जागत सोवत सरन तुम्हारी॥
जो सबके प्रिय और सबका हित करने वाले हैं, जिन्हें दुःख और सुख तथा प्रशंसा
(बड़ाई) और गाली (निन्दा) समान हैं, जो विचारकर सत्य और प्रिय वचन बोलते हैं
तथा जो जागते-सोते आपकी ही शरण हैं,॥२॥
तुम्हहि छाड़ि गति दूसरि नाहीं।
राम बसहु तिन्ह के मन माहीं॥
जननी सम जानहिं परनारी।
धनु पराव बिष तें बिष भारी॥
राम बसहु तिन्ह के मन माहीं॥
जननी सम जानहिं परनारी।
धनु पराव बिष तें बिष भारी॥
और आपको छोड़कर जिनके दूसरी कोई गति (आश्रय) नहीं है, हे रामजी! आप उनके मन में
बसिये। जो परायी स्त्री को जन्म देनेवाली माता के समान जानते हैं और पराया धन
जिन्हें विष से भी भारी विष है;॥३॥
जे हरषहिं पर संपति देखी।
दुखित होहिं पर बिपति बिसेषी॥
जिन्हहि राम तुम्ह प्रानपिआरे।
तिन्ह के मन सुभ सदन तुम्हारे।
दुखित होहिं पर बिपति बिसेषी॥
जिन्हहि राम तुम्ह प्रानपिआरे।
तिन्ह के मन सुभ सदन तुम्हारे।
जो दूसरेकी सम्पत्ति देखकर हर्षित होते हैं और दूसरेकी विपत्ति देखकर विशेष
रूपसे दु:खी होते हैं, और हे रामजी! जिन्हें आप प्राणोंके समान प्यारे हैं,
उनके मन आपके रहनेयोग्य शुभ भवन हैं॥ ४॥
|
|||||
लोगों की राय
No reviews for this book






