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रामायण >> श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड) श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड)गोस्वामी तुलसीदास
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भारत की सर्वाधिक प्रचलित रामायण। द्वितीय सोपान अयोध्याकाण्ड
दो०- रामु लखन सीता सहित सोहत परन निकेत।
जिमि बासव बस अमरपुर सची जयंत समेत॥१४१॥
जिमि बासव बस अमरपुर सची जयंत समेत॥१४१॥
लक्ष्मणजी और सीताजी सहित श्रीरामचन्द्रजी पर्णकुटीमें ऐसे सुशोभित हैं जैसे
अमरावतीमें इन्द्र अपनी पत्नी शची और पुत्र जयन्त सहित बसता है॥ १४१॥
जोगवहिं प्रभु सिय लखनहि कैसें।
पलक बिलोचन गोलक जैसें॥
सेवहिं लखनु सीय रघुबीरहि।
जिमि अबिबेकी पुरुष सरीरहि॥
पलक बिलोचन गोलक जैसें॥
सेवहिं लखनु सीय रघुबीरहि।
जिमि अबिबेकी पुरुष सरीरहि॥
प्रभु श्रीरामचन्द्रजी सीताजी और लक्ष्मणजी की कैसी सँभाल रखते हैं, जैसे पलकें
नेत्रों के गोलकों की। इधर लक्ष्मणजी श्रीसीताजी और श्रीरामचन्द्रजीकी [अथवा
लक्ष्मणजी और सीताजी श्रीरामचन्द्रजी की] ऐसी सेवा करते हैं जैसे अज्ञानी
मनुष्य शरीर की करते हैं॥१॥
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