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रामायण >> श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड) श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड)गोस्वामी तुलसीदास
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भारत की सर्वाधिक प्रचलित रामायण। द्वितीय सोपान अयोध्याकाण्ड
दो०- समाचार तेहि समय सुनि, सीय उठी अकुलाइ।
जाइ सासु पद कमल जुग, बंदि बैठि सिरु नाइ॥५७॥
जाइ सासु पद कमल जुग, बंदि बैठि सिरु नाइ॥५७॥
दीन्हि असीस सासु मृदु बानी।
अति सुकुमारि देखि अकुलानी॥
बैठि नमितमुख सोचति सीता।
रूप रासि पति प्रेम पुनीता॥
अति सुकुमारि देखि अकुलानी॥
बैठि नमितमुख सोचति सीता।
रूप रासि पति प्रेम पुनीता॥
चलन चहत बन जीवन नाथू।
केहि सुकृती सन होइहि साथू॥
की तनु प्रान कि केवल प्राना।
बिधि करतबु कछु जाइ न जाना।
केहि सुकृती सन होइहि साथू॥
की तनु प्रान कि केवल प्राना।
बिधि करतबु कछु जाइ न जाना।
चारु चरन नख लेखति धरनी।
नूपुर मुखर मधुर कबि बरनी॥
मनहुँ प्रेम बस बिनती करहीं।
हमहि सीय पद जनि परिहरहीं।
नूपुर मुखर मधुर कबि बरनी॥
मनहुँ प्रेम बस बिनती करहीं।
हमहि सीय पद जनि परिहरहीं।






