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रामायण >> श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड) श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड)गोस्वामी तुलसीदास
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भारत की सर्वाधिक प्रचलित रामायण। द्वितीय सोपान अयोध्याकाण्ड
दो०- प्राननाथ करुनायतन, सुंदर सुखद सुजान।
तुम्ह बिनु रघुकुल कुमुद बिधु, सुरपुर नरक समान॥६४॥
तुम्ह बिनु रघुकुल कुमुद बिधु, सुरपुर नरक समान॥६४॥
मातु पिता भगिनी प्रिय भाई।
प्रिय परिवारु सुहृद समुदाई॥
सासु ससुर गुर सजन सहाई।
सुत सुंदर सुसील सुखदाई॥
प्रिय परिवारु सुहृद समुदाई॥
सासु ससुर गुर सजन सहाई।
सुत सुंदर सुसील सुखदाई॥
जहँ लगि नाथ नेह अरु नाते।
पिय बिनु तियहि तरनिहु ते ताते॥
तनु धनु धामु धरनि पुर राजू।
प्पति बिहीन सबु सोक समाजू॥
पिय बिनु तियहि तरनिहु ते ताते॥
तनु धनु धामु धरनि पुर राजू।
प्पति बिहीन सबु सोक समाजू॥
भोग रोगसम भूषन भारू।
जम जातना सरिस संसारू॥
प्राननाथ तुम्ह बिनु जग माहीं।
मो कहुँ सुखद कतहुँ कछु नाहीं॥
जम जातना सरिस संसारू॥
प्राननाथ तुम्ह बिनु जग माहीं।
मो कहुँ सुखद कतहुँ कछु नाहीं॥






