|
रामायण >> श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड) श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड)गोस्वामी तुलसीदास
|
|
||||||
भारत की सर्वाधिक प्रचलित रामायण। द्वितीय सोपान अयोध्याकाण्ड
दो०- ऐसेउ बचन कठोर सुनि, जौं न हृदउ बिलगान।
तौ प्रभु बिषम बियोग दुख, सहिहहिं पावर प्रान॥६७॥
तौ प्रभु बिषम बियोग दुख, सहिहहिं पावर प्रान॥६७॥
अस कहि सीय बिकल भइ भारी।
बचन बियोगु न सकी सँभारी॥
देखि दसा रघुपति जियँ जाना।
हठि राखें नहिं राखिहि प्राना।
बचन बियोगु न सकी सँभारी॥
देखि दसा रघुपति जियँ जाना।
हठि राखें नहिं राखिहि प्राना।
कहेउ कृपाल भानुकुलनाथा।
परिहरि सोचु चलहु बन साथा॥
नहिं बिषाद कर अवसरु आजू।
बेगि करहु बन गवन समाजू॥
परिहरि सोचु चलहु बन साथा॥
नहिं बिषाद कर अवसरु आजू।
बेगि करहु बन गवन समाजू॥
कहि प्रिय बचन प्रिया समुझाई।
लगे मातु पद आसिष पाई॥
बेगि प्रजा दुख मेटब आई।
जननी निठुर बिसरि जनि जाई॥
लगे मातु पद आसिष पाई॥
बेगि प्रजा दुख मेटब आई।
जननी निठुर बिसरि जनि जाई॥






