|
रामायण >> श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड) श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड)गोस्वामी तुलसीदास
|
|
||||||
भारत की सर्वाधिक प्रचलित रामायण। द्वितीय सोपान अयोध्याकाण्ड
लक्ष्मण निषाद संवाद, श्रीराम सीता से सुमन्त्र का संवाद, सुमन्त्र का लौटना
सोवत प्रभुहि निहारि निषादू।
भयउ प्रेम बस हृदयँ बिषादू॥
तनु पुलकित जलु लोचन बहई।
बचन सप्रेम लखन सन कहई।
भयउ प्रेम बस हृदयँ बिषादू॥
तनु पुलकित जलु लोचन बहई।
बचन सप्रेम लखन सन कहई।
भूपति भवन सुभायँ सुहावा।
सुरपति सदनु न पटतर पावा॥
मनिमय रचित चारु चौबारे।
जनु रतिपति निज हाथ सँवारे॥
सुरपति सदनु न पटतर पावा॥
मनिमय रचित चारु चौबारे।
जनु रतिपति निज हाथ सँवारे॥
दो०- सुचि सुबिचित्र सुभोगमय, सुमन सुगंध सुबास।
पलँग मंजु मनि दीप जहँ, सब बिधि सकल सुपास॥९०॥
पलँग मंजु मनि दीप जहँ, सब बिधि सकल सुपास॥९०॥
बिबिध बसन उपधान तुराईं।
छीर फेन मृदु बिसद सुहाई॥
तहँ सिय रामु सयन निसि करहीं।
निज छबि रति मनोज मदु हरहीं॥
छीर फेन मृदु बिसद सुहाई॥
तहँ सिय रामु सयन निसि करहीं।
निज छबि रति मनोज मदु हरहीं॥






