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रामायण >> श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड) श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड)गोस्वामी तुलसीदास
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भारत की सर्वाधिक प्रचलित रामायण। द्वितीय सोपान अयोध्याकाण्ड
दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
लेत सोच भरि छिनु छिनु छाती।
जनु जरि पंख परेउ संपाती।
राम राम कह राम सनेही।
पुनि कह राम लखन बैदेही॥
जनु जरि पंख परेउ संपाती।
राम राम कह राम सनेही।
पुनि कह राम लखन बैदेही॥
राजा क्षण-क्षणमें सोचसे छाती भर लेते हैं। ऐसी विकल दशा है मानो [गीधराज
जटायुका भाई] सम्पाती पंखोंके जल जानेपर गिर पड़ा हो। राजा [बार-बार] 'राम,
राम', 'हा स्नेही (प्यारे) राम!' कहते हैं, फिर 'हा राम, हा लक्ष्मण, हा जानकी'
ऐसा कहने लगते हैं॥४॥
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