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रामायण >> श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड) श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड)गोस्वामी तुलसीदास
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भारत की सर्वाधिक प्रचलित रामायण। द्वितीय सोपान अयोध्याकाण्ड
सुनिअ सुधा देखिअहिं गरल सब करतूति कराल।
जहँ तहँ काक उलूक बक मानस सकृत मराल ॥२८१॥
जहँ तहँ काक उलूक बक मानस सकृत मराल ॥२८१॥
अमृत केवल सुनने में आता है और विष जहाँ-तहाँ प्रत्यक्ष देखे जाते हैं। विधाता
की सभी करतूतें भयङ्कर हैं। जहाँ-तहाँ कौए, उल्लू और बगुले ही [दिखायी देते]
हैं; हंस तो एक मानसरोवर में ही है ॥ २८१॥
सुनि ससोच कह देबि सुमित्रा।
बिधि गति बडि बिपरीत बिचित्रा।
जो सृजि पालइ हरइ बहोरी।
बालकेलि सम बिधि मति भोरी॥
बिधि गति बडि बिपरीत बिचित्रा।
जो सृजि पालइ हरइ बहोरी।
बालकेलि सम बिधि मति भोरी॥
यह सुनकर देवी सुमित्राजी शोकके साथ कहने लगीं-विधाताकी चाल बड़ी ही विपरीत और
विचित्र है, जो सृष्टिको उत्पन्न करके पालता है और फिर नष्ट कर डालता है।
विधाताकी बुद्धि बालकोंके खेलके समान भोली (विवेकशून्य) है॥१॥
कौसल्या कह दोसु न काहू।
करम बिबस दुख सुख छति लाहू॥
कठिन करम गति जान बिधाता।
जो सुभ असुभ सकल फल दाता।
करम बिबस दुख सुख छति लाहू॥
कठिन करम गति जान बिधाता।
जो सुभ असुभ सकल फल दाता।
कौसल्याजीने कहा-किसीका दोष नहीं है; दुःख-सुख, हानि-लाभ सब कर्मके अधीन हैं।
कर्मकी गति कठिन (दुर्विज्ञेय) है, उसे विधाता ही जानता है, जो शुभ
और अशुभ सभी फलोंका देनेवाला है ॥२॥ ईस रजाइ सीस सबही कें।
उतपति थिति लय बिषहु अमी कें॥
देबि मोह बस सोचिअ बादी।
बिधि प्रपंचु अस अचल अनादी॥
उतपति थिति लय बिषहु अमी कें॥
देबि मोह बस सोचिअ बादी।
बिधि प्रपंचु अस अचल अनादी॥
ईश्वरकी आज्ञा सभीके सिरपर है। उत्पत्ति, स्थिति (पालन) और लय (संहार) तथा अमृत
और विषके भी सिरपर है (ये सब भी उसीके अधीन हैं)। हे देवि! मोहवश सोच करना
व्यर्थ है। विधाताका प्रपञ्च ऐसा ही अचल और अनादि है॥३॥
भूपति जिअब मरब उर आनी।
सोचिअ सखि लखि निज हित हानी॥
सीय मातु कह सत्य सुबानी। सोचिअ सखि लखि निज हित हानी॥
सुकृती अवधि अवधपति रानी॥
महाराज के मरने और जीने की बात को हृदय में याद करके जो चिन्ता करती हैं, वह तो हे सखी! हम अपने ही हितकी हानि देखकर (स्वार्थवश) करती हैं। सीताजीकी माताने कहा-आपका कथन उत्तम और सत्य है। आप पुण्यात्माओंके सीमारूप अवधपति (महाराज दशरथजी) की ही तो रानी हैं। [फिर भला, ऐसा क्यों न कहेंगी] ॥ ४॥
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