रामायण >> श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड)

श्रीरामचरितमानस अर्थात तुलसी रामायण (अयोध्याकाण्ड)

गोस्वामी तुलसीदास

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2020
पृष्ठ :0
मुखपृष्ठ :
पुस्तक क्रमांक : 10
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भारत की सर्वाधिक प्रचलित रामायण। द्वितीय सोपान अयोध्याकाण्ड

भरतजी की विदाई



मुनिगन गुर धुर धीर जनक से।
ग्यान अनल मन कसे कनक से॥
जे बिरंचि निरलेप उपाए।
पदुम पत्र जिमि जग जल जाए।

मुनिगण, गुरु वसिष्ठजी और जनकजी-सरीखे धीरधुरन्धर जो अपने मनों को ज्ञानरूपी अग्निमें सोने के समान कस चुके थे, जिनको ब्रह्माजीने निर्लेप ही रचा और जो जगरूपी जलमें कमलके पत्तेकी तरह ही (जगत्में रहते हुए भी जगत्से अनासक्त) पैदा हुए, ॥ ४॥

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